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आईआईटी बीएचयू बच्चों को सिखा रहा साइंस

आईआईटी बीएचयू बच्चों को सिखा रहा साइंस
तस्वीर: inextlive

By: Inextlive | Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 23:14:56 (IST)

साइंस को समझने के लिए सिर्फ किताबें पढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे एक्सपेरिमेंट के जरिए समझना भी जरूरी है. इसी सोच के साथ आईआईटी बीएचयू स्कूल के स्टूडेंट्स को साइंस से जोड़ने का काम कर रहा है.

वाराणसी (ब्यूरो)। साइंस को समझने के लिए सिर्फ किताबें पढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे एक्सपेरिमेंट के जरिए समझना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ आईआईटी बीएचयू स्कूल के स्टूडेंट्स को साइंस से जोड़ने का काम कर रहा है। इसके तहत काशी विद्यापीठ ब्लॉक के स्कूल में ग्राम साइंस 2026 का ऑर्गनाइजेशन किया गया। यहां क्लास छह से आठ तक के स्टूडेंट्स को साइंस के कॉन्सेप्ट आसान तरीके से समझाए गए। उन्होंने साइंटिफिक मॉडल देखे, अलग-अलग एक्टिविटीज में पार्टिसिपेट किया और जाना कि साइंस का इस्तेमाल डेली लाइफ की प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने में कैसे किया जा सकता है.

एक्सपेरिमेंट से समझे साइंस के कॉन्सेप्ट

आईआईटी बीएचयू के वर्चुअल सस्टेनेबल डेवलपमेंट सेंटर ने इंडियन नेशनल यंग एकेडमी ऑफ साइंसेज (आईएनवाईएएस) और इंस्टीट्यूट की सोशल सर्विस काउंसिल के साथ मिलकर यह प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया। इसमें स्टूडेंट्स को वेस्ट मैनेजमेंट, वॉटर कंजर्वेशन, रिन्यूएबल एनर्जी, माइक्रोऑर्गेनिज्म, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, बायोडायवर्सिटी और पब्लिक हेल्थ जैसे टॉपिक्स के बारे में बताया गया। इन एक्टिविटीज के जरिए बच्चों ने समझा कि साइंस सिर्फ स्कूल की बुक्स तक लिमिटेड नहीं है। इसका यूज पानी बचाने, वेस्ट मैनेजमेंट और एनवायरनमेंट को सुरक्षित रखने में भी किया जा सकता है। क्विज, डिस्कशन और एक्सपेरिमेंट के जरिए स्टूडेंट्स को सवाल पूछने और अपने आइडियाज शेयर करने का मौका मिला.

यंग इनोवेटर्स चैलेंज में शेयर किए आइडियाज

प्रोग्राम में यंग इनोवेटर्स चैलेंज भी ऑर्गनाइज किया गया। इसके जरिए स्टूडेंट्स को अपने नए आइडियाज प्रेजेंट करने का मौका मिला। इसका मकसद बच्चों को अपने आसपास की प्रॉब्लम्स को समझने और उनके सॉल्यूशन के बारे में सोचने के लिए मोटिवेट करना था। इस तरह बच्चे साइंस को सिर्फ याद करने के बजाय उसे प्रैक्टिकली समझने की कोशिश कर सके.

साइंटिस्ट से बातचीत कर बढ़ा इंटरेस्ट

प्रोग्राम में मुंबई स्थित भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) से जुड़े साइंटिस्ट डॉ। संतोष ने भी पार्टिसिपेट किया। उन्होंने स्टूडेंट्स से बातचीत की और उन्हें साइंस व रिसर्च की दुनिया के बारे में बताया। साइंटिस्ट से सीधे बातचीत का मौका मिलने पर बच्चे काफी एक्साइटेड नजर आए। प्रोग्राम के दौरान कुछ स्टूडेंट्स ने फ्यूचर में न्यूक्लियर साइंटिस्ट बनने की इच्छा भी जताई.

साइंस को आसान बनाना है मकसद

प्रोग्राम के कोऑर्डिनेटर और आईआईटी बीएचयू के स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ। अभिषेक सुरेश धाबले ने बताया कि ग्राम साइंस का मकसद बच्चों के लिए साइंस को सिंपल, इंटरेस्टिंग और यूजफुल बनाना है। इससे बच्चों में सवाल पूछने, लॉजिकल थिंकिंग और नए सॉल्यूशन खोजने की आदत डेवलप हो सकती है। एसडीजी सेंटर के इंचार्ज प्रो। विकास कुमार दुबे ने वॉटर कंजर्वेशन, रिन्यूएबल एनर्जी और रिसोर्सेज के सही इस्तेमाल को लेकर अवेयरनेस बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं, प्रोग्राम के को-कोऑर्डिनेटर डॉ। प्रांजल चंद्र ने कहा कि एक्सपेरिमेंट और एक्टिविटीज से बच्चे साइंस को सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि उसे करके भी समझते हैं.

फेक्ट एंड फीगर

-क्लास 6 से 8 तक के स्टूडेंट्स ने लिया पार्ट

-7 साइंस टॉपिक्स पर हुई एक्टिविटीज

-3 संस्थानों के सहयोग से हुआ प्रोग्राम

-यंग इनोवेटर्स चैलेंज में बच्चों ने शेयर किए आइडियाज

-साइंटिफिक मॉडल और एक्सपेरिमेंट से समझे साइंस कॉन्सेप्ट

-वेस्ट मैनेजमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी की मिली जानकारी

-बीएआरसी के साइंटिस्ट डॉ। संतोष ने बच्चों से किया इंटरैक्शन

-कुछ स्टूडेंट्स ने न्यूक्लियर साइंटिस्ट बनने की जताई इच्छा

हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स को साइंटिफिक नॉलेज को अपने कैंपस से बाहर स्कूलों और सोसाइटी तक पहुंचाना चाहिए। ग्राम साइंस 2026 इसी दिशा में एक कोशिश है, जिससे स्कूल के स्टूडेंट्स में साइंस को लेकर इंटरेस्ट बढ़े और वे फ्यूचर में इनोवेशन व रिसर्च के फील्ड में आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट हों।

प्रो। अमित पात्रा, डायरेक्टर, आईआईटी बीएचयू

स्रोत: यह सामग्री inextlive द्वारा प्रकाशित की गई थी — पूरा श्रेय मूल प्रकाशक का है।
मूल लिंक: https://www.inextlive.com/uttar-pradesh/varanasi/varanasi-news-iit-bhu-is-teaching-science
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